कौन थे अल्लूरी सीताराम राजू-कोमाराम भीम? जिनकी कहानी पर बनी राजामौली की RRR!

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बाहुबली निर्देशक एस.एस.राजामौली की फिल्म RRR का ट्रेलर रिलीज हो गया है. चंद मिनट का ट्रेलर देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिल्म कितनी जबरदस्त होने वाली है. राजामौली की ये फिल्म देशभक्ति की कहानी से भरपूर है, जिसमें आपको दोस्ती और धोखा भी देखने को मिलेगा. RRR के ट्रेलर में हमने दमदार एक्शन्स और डायलॉग देख लिये हैं, जिसकी जितनी तारीफ करो कम है. चलिये अब जानते हैं उन रियल लाइफ हीरोज के बारे में जिनसे प्रेरित होकर राजामौली ने 400 करोड़ रुपये की फिल्म बना डाली.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म RRR की कहानी सच्ची घटना पर आधारित है, जिसे एस. एस. राजामौली (S. S. Rajamouli) ने थोड़े से काल्पनिक अंदाजा में पेश किया है। इस फिल्म की कहानी रियल लाइफ हीरो अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम पर आधारित है, जिन्होंने साल 1920 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया था।

कौन थे अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम

फिल्म RRR की कहानी को कथित तौर पर काल्पनिक कहा जा सकता है, लेकिन इसकी जड़ें अंग्रेजों से लोहा लेने वाले दो वीर पुरुषों से जुड़ी हुई है। सीताराम राजू का जन्म सन् 1897 में विशाखापटनम में हुआ था, जबकि कोमाराम भीम का जन्म का साल 1900 में आदिलाबाद के संकेपल्ली गांव में हुआ था।

सीताराम और कोमाराम की उम्र में ज्यादा फर्क नहीं था, इसलिए इन दिनों की लड़कों ने बचपन से अंग्रेजों के अत्याचार को सहन किया था। ऐसे में सीताराम राजू और कोमाराम भीम के मन में बचपन से ही अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ने का साहस जाग उठा था, जिसके लिए उन्होंने अलग अलग रणनीति अपनाई थी।

अंग्रेजों के खिलाफ शुरू किया था विद्रोह

अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए कोमाराम भीम ने आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों को इकट्ठा किया और फिर उनके साथ मिलकर हैदराबाद की आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था, उन्हें गोरिल्ला युद्ध में महारत हासिल थी। ऐसे में कोमाराम भीम और उनके साथियों ने मिलकर साल 1928 से लेकर 1940 तक निजाम और उसकी सेना से युद्ध किया था, इसी दौरान कोमाराम भीम को युद्ध लड़ते लड़ते वीरगति प्राप्त हुई थी।

वहीं दूसरी तरफ सीताराम राजू ने अंग्रेजों के निकट रहते हुए उनकी रणनीति को समझने की कोशिश की, जिसके बाद उन्होंने साल 1922 से 1924 के बीच राम्पा विद्रोह का नेतृत्व किया था। इस विद्रोह के दौरान सीताराम राजू ने ब्रिटिश सैनिकों के छक्के छुड़ा दिए थे, जिसकी वजह से अंग्रेजों की सेना कमजोर पड़ने लगी थी।

ऐसे में अंग्रेजों ने सीताराम राजू के खिलाफ दमन नीति अपनाने का फैसला किया, क्योंकि वह जानते थे कि अगर सीताराम राजू जीवित रहे तो वह भारत को आजादी दिलाने के लिए जीन जान लगा देंगे। ऐसे में ब्रिटिश शासकों ने सीताराम राजू को लड़ाई के दौरान कैद कर लिया और फिर उन्हें एक पेड़ से बांधकर अनगिनत गोलियों से भुन डाला था, जिसकी वजह से सीताराम राजू भी देश के लिए लड़ते लड़ते शहीद हो गए थे।

एक्शन सीन्स से भरपूर है फिल्म RRR

फिल्म RRR में सीताराम राजू और कोमाराम भीम के उसी संघर्ष व युद्ध नीति को दर्शाया गया है, जिसे ज्यादा दिलचस्प बनाने के लिए निर्देशक एस. एस. राजामौली ने फिल्म में कुछ फिक्शनल सीन डाले हैं।

इतना ही नहीं फिल्म को लंबा खींचने के लिए उसकी कहानी में काल्पनिक तथ्यों को भी शामिल किया गया है, लेकिन इन सब से सीताराम और कोमाराम के संघर्ष और उनके द्वारा आदिवासियों के वन अधिकारों के लिए लड़ी गई लड़ाई में कोई फर्क नहीं पड़ा है।

ऐसे में अगर आप भी सीताराम राजू और कोलाराम भीम की क्रांतिकारी कहानी से जुड़ना चाहते हैं, तो आज ही फिल्म RRR की टिकट बुक करवा लिजिए। अब तक इस फिल्म ने 500 करोड़ रुपए की कमाई का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि दर्शकों को भी फिल्म और उसके एक्शन सीन्स काफी ज्यादा पसंद आ रही है।