The kashmir files movie review:विवेक ने पलटे कश्मीरी पंडितों के घावों के पन्ने ‘द कश्मीर फाइल्स’

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विवेक अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी द कश्मीर फाइल्स दर्शकों को जबरदस्त तरीके से पसंद आ रही है. इंटरनेट पर फिल्म की तारीफ़ की सुनामी नजर आ रही है. याद नहीं आता कि दर्शक किसी फिल्म को लेकर इतना मुखर कब रहे हैं. कुछ दर्शकों का तो यहां तक मानना है कि फिल्म के जरिए कश्मीर घाटी में आतंकवाद, हिंदू-सिखों के व्यापक नरसंहार, तत्कालीन राजनीति और कश्मीरी पंडितों के पलायन और अपने ही देश में शरणार्थी बनने पर पहली बार विवेक के रूप में किसी निर्देशक ने प्रभावशाली अंदाज में सच दिखाने का साहस किया है. वह सच जो अपने रूप में है. लोग फिल्म का इतना सपोर्ट कर रहे कि द कश्मीर फाइल्स की टिकट खिड़की के बाहर भीड़ का रेला नजर आ रहा है.

द कश्मीर फाइल्स मात्र 14 करोड़ से कम बजट में बनी बताई जा रही है. शुक्रवार को फिल्म देश में महज 500 स्क्रीन्स पर रिलीज की गई थी, मगर इसने दो दिन के अंदर ही 12 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है. भारी डिमांड की वजह से रविवार को फिल्म के स्क्रीन्स बढ़ा दिए गए हैं और अब यह 2000 स्क्रीन्स पर शोकेस हो रही है. इस आधार पर देखें तो फिल्म अकेले रविवार को 20 करोड़ रुपये तक की कमाई कर ले तो हैरान नहीं होना चाहिए. एक मामूली बजट और लो स्टारकास्ट मूवी का बॉक्स ऑफिस, निश्चित ही ट्रेंड सर्किल को हैरान करने वाला माना जाएगा.

क्या है फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी कश्मीर के एक टीचर पुष्कर नाथ पंडित (अनुपम खेर) की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है. कृष्णा (दर्शन कुमार) दिल्ली से कश्मीर आता है, अपने दादा पुष्कर नाथ पंडित की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए. कृष्णा अपने दादा के जिगरी दोस्त ब्रह्मा दत्त (मिथुन चक्रवर्ती) के यहां ठहरता है. उस दौरान पुष्कर के अन्य दोस्त भी कृष्णा से मिलने आते हैं. इसके बाद फिल्म फ्लैशबैक में जाती है.

फ्लैशबैक में दिखाया जाता है कि 1990 से पहले कश्मीर कैसा था. इसके बाद 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों को मिलने वाली धमकियों और जबरन कश्मीर और अपना घर छोड़कर जाने वाली उनकी पीड़ादायक कहानी को दर्शाया जाता है. कृष्णा को नहीं पता होता कि उस दौरान उसका परिवार किस मुश्किल वक्त से गुजरा होता है. इसके बाद 90 के दशक की घटनाएं की परतें उसके सामने खुलती हैं और दर्शाया जाता है कि उस दौरान कश्मीरी पंडित किस पीड़ा से गुजरे थे. पूरी कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है.

एक्टर्स की तारीफ़

कलाकारों की एक्टिंग ने इस फिल्म को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया है. वैसे तो अनुपम खेर ने कई बार अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है, लेकिन इस फिल्म में अनुपम खेर ने पुष्कर नाथ पंडित के किरदार को ऐसे निभाया कि दर्शक आश्चर्यचकित रह जाएंगे. उन्होंने एक बार फिर से ये साबित किया कि वह फिल्म इंडस्ट्री के सबसे शानदार वर्सेटाइल एक्टर हैं. वहीं, मिथुन चक्रवर्ती ने भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है. एक स्टूडेंट लीडर के तौर पर दर्शन कुमार ने बहुत ही प्रभावी अभिनय का प्रदर्शन किया.

वहीं, पल्लवी जोशी की बात करें तो ‘द ताशकंद फाइल्स’ के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला था और एक बार फिर से उन्होंने साबित किया कि वह ‘द कश्मीर फाइल्स’ के लिए भी पुरस्कार की मजबूत दावेदार हैं. यहां पर चिन्मय की एक्टिंग की भी तारीफ करना चाहेंगे, जिन्होंने फारुक अहमद के तौर पर स्क्रीन पर एक अमिट छाप छोड़ी है. इनके अलावा बाकी कलाकारों ने भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है.

The Kashmir files movie

यह फिल्म कमजोर दिल वाले लोगों के लिए नहीं है. अगर आपका दिल मजबूत है तो ही आप इस फिल्म को देखें, क्योंकि फिल्म में कई ऐसे सीन हैं, जिन्हें देखकर आप अपनी आंखें बंद कर सकते हैं. फिल्म अच्छी है, इसे आपको एक बार जरूर देखना चाहिए.