जमात-उल-विदा: जानें क्यों है इस दिन की खास अहमियत

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jamat ul vida

Jamat ul-Vida – जमात उल विदा एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है ‘जुमे की विदाई’। जमात उल विदा के पर्व को पूरे मुस्लिमों समुदाय के लोगों द्वारा काफी धूम-धाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग जश्न मनाते हैं और एक दूसरे को गले लगाते हैं। इस दिन नमाज़ का खास महत्व होता है इसलिए मुस्लिम लोग नमाज़ ज़रुर अदा करते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कब और क्यों मनाया जाता है जमात-उल-विदा का पर्व?

जमात उल विदा का पर्व कब मनाया जाता है

जमात-उल-विदा अरबी भाषा का शब्द है, इसका अर्थ है जुमे (शुक्रवार Friday) की विदाई। यह खास पर्व रमज़ान  के अखिरी शुक्रवार यानी जुमे के दिन मनाया जाता है। वैसे तो रमज़ान  के पूरे महीने को काफी पवित्र माना जाता है लेकिन जमात उल विदा के मौके पर रखे जाने वाला रोजा अपना एक अलग और खास महत्व रखता है। इस साल जमात-उल-विदा 29 अप्रैल 2022 को है।

जमात उल विदा का पर्व क्यों मनाया जाता है

जमात-उल-विदा मुस्लिम समुदाय का खास और प्रमुख पर्व है। यह त्योहार रमज़ान  के अंतिम शुक्रवार (friday ) को मनाया जाता है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज़  अदा करते हैं नमाज़  पढ़ने का इस दिन विशेष महत्व माना गया है। इस पर्व को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस दिन पैगम्बर मोहम्मद साहब ने अल्लाह की विशेष इबादत की थी और यही कारण है कि इस शुक्रवार (friday ) को बाकी के जुमे के दिनों से ज़्यादा महत्वपूर्ण और खास बताया गया है। ये भी कहा जाता है कि जमात-उल-विदा के दिन जो लोग नमाज़  पढ़कर अल्लाह की इबादत करते हैं उन्हें अल्लाह की विशेष रहमत और बरकत प्राप्त होती है। इस दिन सभी मुस्लिम लोग साफ  कपड़े पहनकर मस्जिद जाते हैं और नमाज़  अदा करते हैं। अल्लाह से अपने सभी पापों के लिए माफी मांगते हैं। जमात-उल-विदा के दिन सभी मस्जिदों और दरगाहों काफी सुंदर तरीके से सजाया जाता है। बड़ी संख्या में सभी मुस्लिम समुदाय के लोग एकजुट होते हैं और एक दूसरे को गले लगाकर जमात-उल-विदा की बधाई देते हैं।

जमात-उल-विदा का इतिहास

रमजान का यह आखिरी शुक्रवार लोगो को आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करता है। ताकि वह अपने अच्छे-बुरे कर्मों के विषय में सोच सके और अपने बुरे कार्यों से तौबा करें क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति नमाज पढ़ते हुए सच्चे दिल से अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगता है। उसके पापों को अल्लाह द्वारा क्षमा कर दिया जाता है। अपने इन्हीं धार्मिक और ऐतिहासिक महत्वों के कारण जमात-उल-विदा के इस पर्व को इस्लाम धर्म के अनुयायियों द्वारा इतना महत्वपूर्ण माना जाता है।

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