चैत्र नवरात्री कलश स्थापना व् पूजा विधि

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सामान्य तौर पर, जनवरी के पहले दिन पूरी दुनिया में नया साल मनाया जाता है। इसकी शुरुआत चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि से होती है। चैत्र मां की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही नया साल भी शुरू हो जाता है. मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि को मां का जन्म हुआ था और मां दुर्गा के कहने पर ही ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना शुरू की थी। नए साल की शुरुआत भी मौसम में बदलाव लाती है, इसलिए नए साल की शुरुआत में मौसम में बदलाव के साथ ही शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उपवास से शरीर स्वस्थ बनता है।

नवरात्रि के नौ दिनों में मां शक्ति के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस त्योहार की तैयारी में घर का हर सदस्य शामिल होता है। बड़ों से लेकर छोटे बच्चों तक सभी को यह पर्व बहुत पसंद आता है। लोग नवरात्रि के दौरान पूजा करने के अलावा जागरण, डांडिया, मेला जैसे अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं। नवरात्रि के दौरान महिलाएं घर को सजाती हैं, खुद का मेकअप करती हैं और मेहंदी लगाती हैं।

नवरात्रि के दौरान पूरे नौ दिनों तक उपवास का बहुत महत्व है। नवरात्रि की शुरुआत कलश की स्थापना से होती है, जिसे घटस्थापना के नाम से भी जाना जाता है। इस नवरात्रि में कलश स्थापना के साथ-साथ जौ की बुवाई भी बहुत महत्वपूर्ण है। जिसे घर की सुख-समृद्धि के लिए बोया जाता है

कलश स्थापना और पूजा विधि -

1. नवरात्रि के दिनों में दोनों समय की पूजा का बहुत महत्व है.

2. सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करके स्वयं को शुद्ध करें।

3. सबसे पहले भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं।

4. एक चौकी लें या मंदिर में ही कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं|

5. इसके ऊपर लाल कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की तस्वीर और मूर्ति स्थापित करें।

6. एक लोटे में जल भर लें और उसपे आम के पत्ते रखें|

7. लोटे के मुख पर कलावा बांधें और उस पर कुमकुम से स्वास्तिक बना लें।

8. अब माँ दुर्गा का नाम लेते हुए भगवान् गणेश जी को याद करते हुए नारियल को जल के लोटे पर स्थापित करें|

9. कलश के आगे हाथ जोड़ कर सर झुका कर प्रणाम करें|

10. अब एक मिटटी का पात्र लें उसपे भी कलावा बांधे पर रोली से स्वस्तिक बनाएं|

11. उस मिटटी के पात्र में मिटटी के बीच जौ ज्वारे बो दें|

12. अब माँ के चरण धोएं और उन्हें जल का छींटा भी दें|

13. उन्हें नए वस्त्र अर्पण करें| लाल या गुलाबी रंग के हो|

14. अब उन्हें सोलाह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पण करें|

15. उन्हें हल्दी कुमकुम का तिलक करें|

16. माँ को सुपारी,पंचमेवा, इलाइची, लौंग, पताशे आदि फल मिठाईयों का भोग लगाएं|

17. अब जो सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, पूरे नवरात्री की- नवरात्री में अखंड जोत जगाई जाती है जिसका फल बहुत ही शुभ होता है| परन्तु आप अपनी क्षमता व् सामर्थ्य के अनुसार जोत जगा सकतें हैं|

अखंड जोत जगाने की विधि-

  •   एक मिट्टी या पीतल या चांदी का दिया लें|
  •   उसमें कलावे की बनी बत्ती लगाएं| और उसमें घी पिघला कर डालें|
  •   कुछ देर बत्ती को पूरा घी में डूबे रहने दे और फिर बत्ती बाहर निकाल उसे प्रज्वलित करें|
  •   जोत जगाते समय माँ दुर्गा का यह मन्त्र पढ़े:- “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते॥

 “अर्थात:हे नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगल मयी हो।कल्याण दायिनी शिवा हो। सब पुरुषार्थो को (धर्म, अर्थ,काम, मोक्ष को) सिद्ध करने वाली हो। शरणागत वत्सला,तीन नेत्रों वाली एवं गौरी हो। हे नारायणी, तुम्हें नमस्कार है।(यह मन्त्र अगर आप पढ़ पाएंतो बहुत उत्तम होगा अन्यथा आप इसे फ़ोन में टीवी में या किसी भी तरह से चला सकतें है)

 अब माँ देवी सप्तशती का पाठ करें और आरती कर अपनी सुबह की पूजा समाप्त करें |

शाम के समय प्रदोष काल के वक़्त माँ दुर्गा चालीसा पढ़ें व् उनकी आरती करें और उन्हें फलाहार भोजन जैसे कुट्टू की पकोड़ी, सामक की पूरी आलू सब्ज़ी आदि का भोग लगाएं और खुद ग्रेहेन करें |